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Jul 12, 2011

तुम्ही से हम ....



हमसे  दूर  हैं  वो  इतने , की  नज़रों  में  समायें हैं ,
हर रोशन चिरागों के पीछे , लगा उन्ही के साये हैं |

दस्तक होती है दरवाजे पर जब कभी ,
यूँ लगा वो हम से मिलने आये हैं |

उनकी मीठी सी यादें दिल में सजाये रहते हैं ,
जैसे एक रात में, अनगिनत तारे समाये रहते हैं |

यादों में जी रहें हैं , उनके सामने के लिए ,
गुरुर है हमको , वो हमारे लिए जमीं पर आये हैं |

जानते हैं हम आपको , मुस्कुरा रहे हैं आप,
क्यूंकि ये शख्स हमे जवाबों में नज़र आयें हैं  |


मेरी किताब की पहली महक.......
ये मेरी सबसे पहली कविताओं में से एक है ......

-Anjali Maahil

15 comments:

  1. बहुत ही खुबसूरत रचना....

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  2. "यादों में जी रहें हैं, उनके सामने के लिए,
    गुरुर है हमको, वो हमारे लिए जमीं पर आये हैं"

    सार्थक प्रयास - और बेहतर कर सकती हैं - शुभकामनाएं

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  3. जानते हैं हम आपको , मुस्कुरा रहे हैं आप,
    क्यूंकि ये शख्स हमे जवाबों में नज़र आयें हैं |

    आपकी सबसे पहली और सबसे बेहतर कविता है.
    बहुत अच्छा लगा पढ़ कर.

    सादर

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  4. यादों में जी रहें हैं , उनके सामने के लिए ,
    गुरुर है हमको , वो हमारे लिए जमीं पर आये हैं |
    waah... kitna haseen gurur

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  5. अच्छी कोशिश थी.......ये अच्छा लगा....

    यादों में जी रहें हैं , उनके सामने के लिए ,
    गुरुर है हमको , वो हमारे लिए जमीं पर आये हैं |

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  6. दस्तक होती है दरवाजे पर जब कभी ,
    यूँ लगा वो हम से मिलने आये हैं |

    बहुत खूब ..सुन्दर अभिव्यक्ति

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  7. बहुत खूब अच्छी कोशिश....सुन्दर अभिव्यक्ति

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  8. अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  9. क्या खुब लिखा है.....बहुत सुंदर आपकी "पहचान" को देखकर तो हम गुमनाम हो गये..लाजवाब..बहुत सुंदर और बैकग्राउंड भी मस्ता है...संवेदनाओं से भरा हुआ....वाह...।

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  10. दस्तक होती है दरवाजे पर जब कभी ,
    यूँ लगा वो हम से मिलने आये हैं | ..मन को छूने वाली प्यारी सी रचना... धन्वाद..

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  11. कल 17/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  12. आप सभी कि शुभकामनाओं और प्रतिक्रियाओं के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!!!

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