कभी कोई मेरी भी फ़िक्र करता ..
बातों ही बातों में मेरा ज़िक्र करता..
मेरी सुबह से उसकी सुबह होती , शाम से उसकी शाम ..
अपनी मुस्कुराती नजरों से अक्सर वो देखा करता ..
कहता मुझे कभी पागल ,तो कभी सताता मुझे
मेरी मुस्कुराहट के लिए अक्सर वो हँसाता मुझे ..
महफ़िल में होती जब कभी बात मेरी ..

पलभर के लिए ,सही मुझे महसूस करता ..
बेफिक्र उसके कंधे पर सर रखकर मै सो जाया करती
मुझे तडपाने के लिए किसी और की बातें करता ...
मै रूठ कर चली जाती , न आने का वादा देकर
वो उदास भरी नजरों से मुझे रोका करता ...
काश कभी कोई मेरी भी फ़िक्र करता ..
बातों ही बातों में मेरा जिक्र करता.....!
-Anjali Maahil