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May 30, 2011

ये मेरा शहर दिल्ली

ये मेरा शहर दिल्ली ,
बड़ी महोब्बतों का शहर है,
किसी से , किसी को ,
शिकायत नही ,
फिर भी बहुत बदनाम हैं ,
उठा उठा कर अंगुलियाँ ,
लोग इसे सलाम देते है !

इसे,
नवाबो के ठाट तो ,
मुफलिसी के पैबंद भी मिले ,
समां दर्द सीने में सबसे ,
मुस्कुरा के मिलता हैं ,
बड़ी  महोब्बतों का शहर हैं ,
ये मेरा शहर दिल्ली !

इसे ,
रातों  को जगमगाहट तो ,
दिन में अँधेरे भी मिलें ,
दुश्मनी में भी सबसे ,
शराफत से मिलता हैं ,
बड़ी महोब्बतों  का शहर है ,
ये मेरा शहर दिल्ली !




वो  और बीज थे थे पलकर , 
जो रह गये इसमें ,
मुसाफिरों के व्याख्यानों में ,
नाम इसे "बाज़ार" मिलता है ,
बड़ी महोब्बतों  का शहर है ,
ये मेरा शहर दिल्ली !



आते हैं बड़ी दूर से आज ,
ख्वाहिशों में जो इसकी  ,
बनाते ही यहाँ 'पहचान' ,
फिर इसे ही भूल जाते हैं ,
फिर भी, इसको किसी से
शिकायत नही ,
बड़ी  महोब्बतों का शहर हैं ,
ये मेरा शहर दिल्ली !



By : Anjali Maahil 

5 comments:

  1. दिल्ली तो दिलवालों की है .
    अंजलि जी! बहुत ख़ूबसूरती से आपने अपने एहसासों को इन शब्दों में संजोया है.


    सादर

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  2. बहुत सटीक चित्र दिल्ली का...

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  3. अच्छी अभिव्यक्ति .....

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  4. aap sabhi ka tahe dil se dhnywad .....aap sabhi apne jeevan me kamyabi payen ....

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