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Jan 12, 2011

इक दरखत पर दस्तखत मेरा भी

 तेरी ज़िंदगी का हर पन्ना हूँ मैं |
तू जब भी उकेरती है शब्द कोई ,
लगता है अनगिनत चीटियाँ मेरे तन पर चल रही हैं |

कभी तुने मुझे इस कदर फेंका ,
कि मैं खुद को उठा भी ना सका ,
मैं  निस्तब्ध रहा , कोने में कहीं ,
स्तब्ध रहा , कोने में कहीं ,
शायद कमजोर था ,
जो पड़ा रहा था ,कोने में कहीं |

जब याद मेरी आयी तो मुझे याद  किया ,
तेरे हर हालात को जीया है  मैंने , तब
जब तुने था मुझे बड़े प्यार से चूमा , तब
जब तुने था मुझे बड़े जोर से जकड़ा , तब
जब रात में और साथ में ,
थी तूने करवट बदली |

कई बार तेरे आसुंओ से भीगा , तो
कई बार गुस्से को भी तेरे है  महसूस किया |
कभी डरा जो तेरी सिहरन से , तो
कई बार तुझे है होंसला भी दिया |

जानता हूँ ये कि ,
दिल तेरा भी दुखता है,  मुझे शयाह करते हुए ,
पर इक फ़र्ज़ तेरा भी है , और मेरा भी है |
कभी जब तूने था मुझे छुआ और फ़ेरी थी उँगलियाँ
धीरे-धीरे,
मुझे भी , दर्द सीने में हुआ था ,
बिछड़े पत्तो की सरसराहट के साथ |
पर सच है आज का  कि-
"तेरी ज़िंदगी का हर पन्ना हूँ मैं"



-{आवाज़ जो है ये इक दरख़्त की ,
मेरी किताबों के थे , जिससे पन्ने बने |
अक्सर ये अकेले में , मुझसे
खुद के जिन्दा होने की बात कहता है | }

BY: Anjali Maahil


10 comments:

  1. very nice anjali ji attached pics also very nice.....

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  2. वृक्ष के दर्द को अच्छे से उकेरा है आपने ..बधाई

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  3. बहुत कोमलता से ..ज़िन्दगी के पन्नो पर मन के दर्द को उकेरा है आपने ....
    बहुत खूबसूरत रचना है ...!!
    बधाई ...एवं शुभकामनायें..!!

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  4. बहुत ही बढ़िया।
    जन्मदिन की हार्दिक बधाई।

    सादर

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  5. कोमल भावो की सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  6. पहली बार आया हूँ आपके ब्लॉग पर , बहुत अच्छा लिखती है आप, इस नज़्म में यादो का जो दर्द आपने उकेरा है , उसकी तारीफ के लिये मेरे पास शब्द नहीं है ..

    आभार
    विजय
    -----------
    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

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  7. कोमल अहसासों को पिरोती हुई एक खूबसूरत रचना. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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