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Sep 15, 2011

मेरे दोष .....

जाने कैसे , मेरे सभी दोष दिख जाते हैं उनको .
मेरी एक मुलाकात में ?
जाने कैसे , छुपा लेते हैं अपनी दक्ष प्रतिभा ....
 वो अपनी एक मुस्कान में ?

वही लोग थे वो,
जिन्होंने ....
मेरे तन की लम्बाई से ,
आँखों की गहराई  ,
और ,मेरी आँखों की गहराई से ,
मेरे मन की ऊंचाई मापी |


वही लोग थे वो,
जिन्होंने ..
मेरे लबों की ख़ामोशी से ,
मुझे बेवकूफ समझा ,
और ,मेरी इसी बेवकूफी से ,
मेरे ज्ञान की सीमा मापी |


वही लोग थे वो,
जिन्होंने ..
मेरे गिरते आंसुओं से ,
मुझे कमजोर समझा ,
और मेरी आँखों की कमजोरी से ,
मेरे होंसलो की दूरी मापी |

बहुत खुश हैं वो ये सोच कर -
"अंदाजों के इन्ही आधारों पर टिकी मेरी हस्ती सारी ..."
जाने कैसे .....मेरे सभी दोष दिख जाते हैं उनको ,
मेरी एक मुलाकात में ?


-ANJALI MAAHIL 


19 comments:

  1. बेहद मर्मस्पर्शी कविता है।

    सादर

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  2. भावमयी मार्मिक अभिव्यक्ति.....

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  3. कल 16/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. आज भी विवाह के लिए यूँ ही लड़कियां देखी और परखी जाती हैं .. और बना ली जाती है एक काल्पनिक छवि ....सटीक अभिव्यक्ति

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  5. बहुत भावमयी प्रस्तुति | उम्दा रचना |

    मेरी नई रचना देखें-

    **मेरी कविता:हिंदी हिन्दुस्तान है**

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  6. वही लोग थे वो,
    जिन्होंने ....
    मेरे तन की लम्बाई से ,
    आँखों की गहराई ,
    और ,मेरी आँखों की गहराई से ,
    मेरे मन की ऊंचाई मापी |वाह! बहुत ही संदर.....

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  7. जिन्हें दोष दिखते हैं वो कहीं न कहीं दुसरो में स्वार्थ देखते है .......और जो अपने को दूसरो से श्रेष्ठ समझते हैं उन्हें दूसरों में सदा दोष ही दिखते है.......बहुत सुन्दर लगी पोस्ट|

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  8. bahut hi sunder bhav...........

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  9. सभी कुछ अंदाज़े पे ही तो टिका हुआ है ..सुन्दर रचना !

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  10. पूर्वाग्रह से ग्रसित लोग ! ये एक विडम्बना है कि इंसान जिसमें समझने कि ताकत है वो खुद को और दूसरों को ठीक से समझ ही नहीं पाता कभी ... सुंदर रचना । शुभकामनाएँ ..

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  11. वही लोग थे वो,
    जिन्होंने ..
    मेरे लबों की ख़ामोशी से ,
    मुझे बेवकूफ समझा ,
    और ,मेरी इसी बेवकूफी से ,
    मेरे ज्ञान की सीमा मापी |...
    बहुत खुश हैं वो ये सोच कर -
    "अंदाजों के इन्ही आधारों पर टिकी मेरी हस्ती सारी ..."
    जाने कैसे .....मेरे सभी दोष दिख जाते हैं उनको ,
    मेरी एक मुलाकात में ?

    दर्द को बहुत अच्छी तरह व्यक्त किया आपने ...अभिनन्दन

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  12. हाथ के पारखी और अच्छे अनुभवी है वे !

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  13. वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ...सुन्‍दर शब्‍दों का संगम ।

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  14. जाने कैसे , मेरे सभी दोष दिख जाते हैं उनको .
    मेरी एक मुलाकात में ?

    जाने कैसे??? सुन्‍दर शब्‍द और कोमल भावनाएं....

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  15. वाह बहुत खूब ,बहुत सुन्दर .....

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  16. सुन्‍दर शब्‍द और कोमल भावनाएं....सुन्दर रचना !

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  17. सुंदर।
    भावभरी रचना।

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