सर्वाधिकार सुरक्षित : - यहाँ प्रकाशित कवितायेँ और टिप्पणियाँ बिना लेखक की पूर्व अनुमति के कहीं भी प्रकाशित करना पूर्णतया अवैध है.

Followers of Pahchan

Sep 4, 2011

कलम : मैं

" हम भी बनेंगे कलम "

उतारेंगे अहसासों को , जज्बातों को
हर मोड़ पर , ठहरे हालातों को , 
हम भी जब बनेंगे कलम !!

रखेंगे अपनी सोच सभी ,
पक्ष -विपक्ष और विचारों को ,
फिर बदले नए हालातों को ,
हम भी जब बनेंगे कलम !!

लिखेंगे "लहरें" - समंदर की ,
संग कश्ती और किनारों को ,
टकराकर टूटी चट्टानों को ,
हम भी जब बनेंगे कलम !!

लिखेंगे बसंत की चंचल बहारों को ,
सावन - घटा और शीत दबी आवाजों को ,
मरू के तपते इंसानों को ,
हम भी जब बनेंगे कलम !!

लिखेंगे अपने शब्दकोश नए ,
संग रचनाओ और भाषाओँ को,
देंगे स्वरूप  नया " परिभाषाओं " को
हम भी जब बनेंगे कलम !!



लहरें =विचार , समंदर =आत्मा , कश्ती =राहें , मार्ग , किनारे =मंजिल , चट्टानों =रूढ़ियाँ 
बसंत =ख़ुशी का समय, 
सावन-घटा =दुःख का समय ,
शीत =वो वक्त जब जीवन में शून्य का अधिपत्य हो जाएँ , मरू =मुश्किलें 

-ANJALI MAAHIL 

17 comments:

  1. मरू के तपते इंसानों को ,
    हम भी जब बनेंगे कलम !!

    धीरे धीरे महसूस कर पा रही हूँ आपकी लेखनी की गहराई को ...
    बहुत पकड़ है आपके लेखन में ...

    ReplyDelete
  2. उतारेंगे अहसासों को , जज्बातों को
    हर मोड़ पर , ठहरे हालातों को ,
    हम भी जब बनेंगे कलम !! waah! bhaut hi behtreen abhivaykti kalam ki....

    ReplyDelete
  3. लिखेंगे अपने शब्दकोश नए ,
    संग रचनाओ और भाषाओँ को,

    बहुत बढ़िया।

    सादर

    ReplyDelete
  4. खूबसूरत बिम्ब ले कर बहुत कुछ कह दिया ..अच्छी अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  5. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    ReplyDelete
  6. कल 05/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  7. सुंदर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  8. Behtarin bimb..sunder prastuti..badhayee ..mere blog per bhi aapka swagat hai

    ReplyDelete
  9. बढ़िया बिम्ब प्रयोग... सुन्दर अभिव्यक्ति...
    सादर...

    ReplyDelete
  10. लिखेंगे अपने शब्दकोश नए ,
    संग रचनाओ और भाषाओँ को,
    देंगे स्वरूप नया " परिभाषाओं " को
    हम भी जब बनेंगे कलम !!
    सुन्दर बिम्बों की सहायता से सजी खूबसूरत रचना

    ReplyDelete
  11. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

    ReplyDelete
  12. बहुत अच्छी प्रस्तुति |
    बधाई |
    आशा

    ReplyDelete
  13. waah...
    maine bhee koshish khee thee aisee hi ek
    kalam ko apna bana kuch likh dene ki ek...
    bahut sundar rachna...

    ReplyDelete
  14. ''फिर बदले नए हालातों को
    हम भी जब बनेंगे कलम.....''


    बेहतरीन भाव।
    सुंदर प्रस्‍तुति.......

    शुभकामनाएं आपको..........

    ReplyDelete




  15. अंजलि माहिल(ममता)जी
    सस्नेहाभिवादन !

    बहुत सुंदर कविता लिखी है -
    लिखेंगे "लहरें" - समंदर की ,
    संग कश्ती और किनारों को ,
    टकराकर टूटी चट्टानों को ,
    हम भी जब बनेंगे कलम !!

    लिखेंगे बसंत की चंचल बहारों को ,
    सावन - घटा और शीत दबी आवाजों को ,
    मरू के तपते इंसानों को ,
    हम भी जब बनेंगे कलम !


    आपने बिंब स्पष्ट कर दिए … आभार !
    संयोग से मैं मरुवासी हूं :)


    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete
  16. सुन्दर प्रतीकों के साथ अनुपम पोस्ट |

    वक़्त मिले तो हमारे ब्लॉग पर भी आयें|

    ReplyDelete

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...